बाबा विश्वनाथ को बांधी गई राखी, शिवभक्तों पर हुई पुष्प वर्षा, गूंजा हर-हर महादेव

वाराणसी(काशीवार्ता)। सावन के पवित्र महीने का अंतिम सोमवार और रक्षाबंधन का पर्व वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तिमय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर शिवभक्तों का विशाल जनसमूह बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर में बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें राखी बांधी गई। मंत्रोच्चार के साथ सुबह मंगला आरती की गई, जिसके बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए।

विशेष श्रृंगार और अभिषेक

सावन के आखिरी सोमवार के महत्व को देखते हुए, काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों का तांता सुबह से ही लगना शुरू हो गया था। भक्तों की भीड़ रात से ही मंदिर के बाहर कतार में लगी हुई थी। सुबह की पहली किरण के साथ मंगला आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान बाबा विश्वनाथ का विशेष अभिषेक और श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में गंगा जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद चमेली के तेल, पंचगव्य, घी, दूध, दही, शहद और फलों के रस से शिवलिंग का अभिषेक किया गया। चंदन का लेपन कर शिवलिंग को सजाया गया, जिससे श्रद्धालुओं को एक दिव्य दर्शन प्राप्त हुआ।

राखी का पर्व और भक्तों पर पुष्प वर्षा

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बाबा विश्वनाथ को विधिपूर्वक राखी बांधी गई। इस विशेष अवसर पर मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने मंदिर में उपस्थित शिवभक्तों और कांवड़ियों पर गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्प वर्षा की। पूरे मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते रहे। इस आयोजन ने श्रद्धालुओं के मन को भक्ति भाव से भर दिया और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

दर्शन-पूजन का अद्भुत दृश्य

मंगला आरती के पश्चात, बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोले गए, और भक्तों का तांता दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच भक्तों ने श्रद्धा से पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर में भारी भीड़ होने के बावजूद भक्तों के चेहरों पर उत्साह और भक्ति की झलक साफ दिखाई दी। मंदिर परिसर में हर ओर आध्यात्मिकता का वातावरण था, जो भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा भर रहा था।

दर्शन-पूजन का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा, और भक्तगण बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते रहे। सावन के इस आखिरी सोमवार और रक्षाबंधन के पर्व ने वाराणसी में श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बनाया। काशी विश्वनाथ मंदिर का यह भव्य आयोजन वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को और भी समृद्ध करता है।

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