
वाराणसी (काशीवार्ता) – प्रयागराज राजमार्ग-19 पर स्थित राजातालाब फ्लाईओवर, जो एक ओर राजातालाब और दूसरी ओर मेहंदीगंज को जोड़ता है, वहां के निवासियों के लिए यह आधुनिक संरचना अब एक भारी मुसीबत बनती जा रही है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि फ्लाईओवर के दक्षिणी लेन से दोनों दिशा में वाहनों की आवाजाही के कारण उन्हें रातभर कंपन और तेज शोर का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी नींद बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
फ्लाईओवर का उत्तरी लेन काँवरियों के लिए सुरक्षित रखा गया है, जिससे सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह दक्षिणी लेन पर ही केंद्रित हो गई है। इससे वाहनों का भार और आवाजाही की तीव्रता दोनों बढ़ गई हैं।
रात के सन्नाटे में गूंजता शोर और थरथराते घर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि विशेषकर रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच फ्लाईओवर से गुजरने वाले ओवरलोड ट्रक तेज आवाज और कंपन पैदा करते हैं। इन ट्रकों की ओवरस्पीडिंग और क्षमता से अधिक भार वहन से कंपन की तीव्रता और भी बढ़ जाती है। निवासियों ने बताया कि कई बार घरों की दीवारें और खिड़कियां तक थरथराने लगती हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार ने स्थानीय नागरिकों के साथ फ्लाईओवर का निरीक्षण किया और कहा कि कंपन व शोर के पीछे फ्लाईओवर के निर्माण में खामियाँ स्पष्ट रूप से नजर आती हैं। फ्लाईओवर के स्तंभों में कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। साथ ही, अंडरपास से जुड़े स्पैन भी क्षतिग्रस्त नजर आते हैं। ध्वनि अवरोधक पैनलों की स्थिति भी बेहद खराब है—कहीं पैनल गायब हैं, तो कहीं बड़ी खाली जगहें हैं, जिससे शोर दोनो मोहल्लों में बेरोकटोक फैलता है।
निवासियों ने बताया कि एक साल पहले भी इसी प्रकार की शिकायतें की गई थीं। उस समय हुए निरीक्षण में भी फ्लाईओवर में गंभीर निर्माण संबंधी दोष पाए गए थे। बीम और स्तंभों में “हनीकॉम्बिंग” की पुष्टि हुई थी और यह भी पाया गया था कि सीमेंट व स्टील का मानक अनुपयुक्त था, जिससे संरचना को अपेक्षित मज़बूती नहीं मिल पाई।
एनएचएआई की ओर से हालांकि इसे “सामान्य दरारें” बताया गया और मरम्मत जारी रखने का दावा किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों का भरोसा अब टूटता जा रहा है। उन्होंने शोर और कंपन को लेकर एक स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन की मांग की है, ताकि स्थिति की वास्तविकता सामने आ सके।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि ट्रकों को फ्लाईओवर पर अधिकतम 18 टन भार की अनुमति है, लेकिन रात में सामान्यतः 50-60 प्रतिशत अधिक भार लेकर वाहन तेज गति से दौड़ते हैं, जिससे फ्लाईओवर पर खतरनाक कंपन उत्पन्न होता है। खासकर जब ऐसे भारी वाहन मिट्टी के आधार वाले बीमों से होकर गुजरते हैं, तो कंपन का स्तर और अधिक बढ़ जाता है।
फ्लाईओवर जो कि आवागमन को सुगम बनाने के लिए बनाया गया था, अब लोगों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। खराब निर्माण, लचर देखरेख और नियमों के उल्लंघन से उपजा यह संकट कब शांत होगा, यह सवाल अब सरकार और जिम्मेदार एजेंसियों के सामने है। स्थानीय लोग जल्द से जल्द ठोस समाधान की मांग कर रहे हैं।