प्रधानमंत्री मोदी के 51वें काशी दौरे की तैयारियां चरम पर: बनौली गांव में बनेगा वॉटरप्रूफ पंडाल, जुटेंगे 80 हजार कार्यकर्ता

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के 51वें दौरे पर आ रहे हैं। इस विशेष दौरे को ऐतिहासिक बनाने में भाजपा पूरी ताकत झोंक रही है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है। यह पहली बार है जब वे 27 देशों से मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मानों और कार्यकाल की दृष्टि से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ने के बाद काशी पधारेंगे। ऐसे में भाजपा इस दौरे को गौरवशाली पल के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।

पीएम मोदी का यह दौरा एक दिवसीय होगा, लेकिन इसकी तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू हो चुकी है। भाजपा के हजारों कार्यकर्ता वाराणसी और आस-पास के क्षेत्रों में जनसम्पर्क अभियान में जुटे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

प्रधानमंत्री की जनसभा सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के बनौली गांव में प्रस्तावित है। अनुमान है कि इस सभा में लगभग 80 हजार लोग शामिल होंगे। बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने विशेष इंतजाम किए हैं। जनसभा स्थल पर जर्मन हैंगर तकनीक से बना विशाल वॉटरप्रूफ पंडाल तैयार किया जा रहा है, जो बारिश और तेज धूप दोनों में सभा को सुरक्षित रखेगा। इस तकनीक से बने पंडाल की खासियत यह है कि यह अत्यधिक मजबूत और टिकाऊ होता है, जिससे कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकेगा।

सुरक्षा के लिहाज से भी प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है। सभा स्थल के पूर्वी छोर पर प्रधानमंत्री के हेलिकॉप्टर के लिए हेलिपैड और एक सेफ हाउस की पहचान कर ली गई है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा बलों की कई टीमें मौके पर तैनात की जाएंगी, ड्रोन से निगरानी और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग भी किया जाएगा।

भाजपा ने इस ऐतिहासिक अवसर को जनसंपर्क और जनसुनवाई का भी माध्यम बनाने की योजना बनाई है। सभा में प्रधानमंत्री केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को साझा करेंगे, साथ ही आने वाले समय में पूर्वांचल के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी हो सकती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह है। भाजपा इसे “गर्व का क्षण” मानते हुए जनता से जुड़ाव को और मजबूत करने का अवसर मान रही है। अब देखना यह होगा कि यह दौरा काशी की राजनीति और विकास की दिशा में कितनी दूरगामी छाप छोड़ता है।

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