
भारत के प्रधानमंत्री जहां दिव्यांगों को लेकर गंभीर दिखते हैं वहीं उनके अंतर्गत आने वाला एक ऐसा विभाग भी है जो दिव्यांगों की जरा से भी सुध नहीं लेना चाहता। जी हां हम बात कर रहे हैं भारत के रेल मंत्रालय की।
गौरतलब है की दिव्यांगों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी जी ने कई बार अपने भाषणों में उनकी सुविधाओं को लेकर कठोर टिप्पणी की है इस बात को नजर अंदाज करने में रेलवे विभाग आगे दिखाई पड़ता है। आपको बताते चले कि जनपद उन्नाव में करोड़ों रुपए की लागत से अमृत योजना के तहत रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। बीते दो वर्ष पूर्व उन्नाव रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक का विस्तार किया गया था। लेकिन उच्च अधिकारियों को स्टेशन के प्लेटफार्म निर्माण में कोई कमी नहीं दिखाई दी। उन्नाव स्टेशन से पूरे देश को जाने वाली लगभग एक सैकड़ा के करीब ट्रेनें हैं। प्लेटफार्म नंबर दो और तीन की बात करें तो वहां दिव्यांगों का पहुंचना बहुत ही मुश्किल है। दिव्यांगों के लिए प्लेटफार्म नंबर 1 से अन्य प्लेटफार्म पर जाने के लिए कोई सुविधा मौजूद नहीं है। जब से स्टेशन का निर्माण हुआ है तब से लेकर अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि या रेलवे अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया है। शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को या तो उसके परिजन अपने कंधों पर उठाकर प्लेटफार्म नंबर दो या तीन पर ले जाएं। या फिर कानपुर व लखनऊ स्टेशन से ट्रेन पकड़ने की जहमत उठना पड़ता है। प्लेटफार्म नंबर 1 से 2 3 4 पर जाने के लिए किसी भी प्रकार की कोई सुविधा मौजूद नहीं है। रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों का एक मात्र साधन सीढ़ियां है जिस पर दिव्यांग व शारीरिक रूप से अक्षम लोग चढ नहीं सकते। रेलवे के बड़े-बड़े अधिकारी कई बार उन्नाव रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करते हैं लेकिन दिव्यांगों के प्रति उनकी यह लापरवाही समझ से परे है। उन्नाव स्टेशन पर ना तो एस्केलेटर(स्वयं चलने वाली सीढ़ी) है ना व्हीलचेयर की सुविधा से ना ही लिफ्ट की सुविधा मौजूद है। यात्री आखिर किस तरह प्लेटफार्म नंबर दो वा तीन पर जाएं या तो ईश्वर ही बता सकता है क्योंकि रेलवे विभाग उन्नाव ने दिव्यांगों के लिए संवेदनाएं समाप्त कर ली है। जनपद के जनप्रतिनिधियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। क्योंकि दिव्यांग शायद उन्हें वोट देने का साधन से ज़्यादा कुछ नहीं समझ आते।
इनसेट-दिव्यांगों की समस्या को लेकर जब ज़िला यात्री संघ के अध्यक्ष मुर्तजा हैदर से बात की तो उन्होंने बताया “उच्चाधिकारियों से कई बार इस बारे में पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया है लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई”
