पंचायत चुनाव समय पर होंगे, सरकार पूरी तरह तैयार; भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील

जातीय जनगणना से लेकर शंकराचार्य के बयान, सुहेलदेव महाराज विवाद और UGC नियमों तक—सरकार का हर मुद्दे पर स्पष्ट और दो टूक पक्ष

वाराणसी (काशीवार्ता)।
उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनावों को लेकर फैलाई जा रही अटकलों और भ्रांतियों पर विराम लगाते हुए सरकार से जुड़े नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे और इसके लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। नेताओं ने जनता से अपील की कि वे किसी भी तरह के भ्रम या अफवाहों में न आएं।
सरकारी पक्ष से यह स्पष्ट किया गया कि राज्य के सभी जिलों में मतदाता सूची का मध्य प्रकाशन पूरा हो चुका है, जबकि 28 तारीख को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके साथ ही नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया 6 फरवरी तक जारी रहेगी।
नेताओं ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर यह भ्रम फैला रहे हैं कि जातीय जनगणना की घोषणा के बाद सरकार उसी में उलझ जाएगी और पंचायत चुनाव टल जाएंगे, जबकि वास्तविकता यह है कि चुनाव प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर सरकार का संवैधानिक रुख
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा गौ माता को “राज्य माता” का दर्जा देने और 100 प्रतिशत मांस निर्यात पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिए गए बयान पर भी सरकार से जुड़े वक्ताओं ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी।
सरकारी नेताओं ने कहा,
“देश और प्रदेश संविधान से चलते हैं। किसी शंकराचार्य, संत या धर्मगुरु के बयान से संविधान नहीं बदला जा सकता। सरकार वही करेगी जो संविधान में निर्धारित है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कैबिनेट के समक्ष गौ माता को राज्य माता का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव आता है, तो उस पर संवैधानिक दायरे में रहकर विचार किया जाएगा। फिलहाल इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सुहेलदेव महाराज के नाम पर राजनीति, राजभर नेताओं के बीच तकरार
महाराजा सुहेलदेव की जयंती और उनके सम्मान को लेकर वाराणसी समेत पूरे प्रदेश में चल रही राजनीति पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
सरकारी पक्ष का आरोप है कि वाराणसी में जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में एक कैबिनेट मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया, वहीं सुहेलदेव महाराज की जयंती के अवसर पर जयकारा तक नहीं लगाने दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक हलकों में ओमप्रकाश राजभर बनाम अनिल राजभर के विवाद के रूप में देखा जा रहा है।
“वोट बेचने” के आरोपों पर ओमप्रकाश राजभर का पलटवार
ओमप्रकाश राजभर पर लगाए जा रहे “वोट बेचने” के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उनके समर्थकों ने तीखा जवाब दिया।
कहा गया,
“अगर किसी में दम है तो बताए कि वोट बेचने की दुकान कहां खुली है। पूरे देश में कहीं एक भी दुकान दिखा दे।”
सुहेलदेव महाराज के लिए किए गए कार्यों का दावा
भारतीय समाज पार्टी की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा गया कि महाराजा सुहेलदेव को सम्मान दिलाने के लिए ठोस कार्य किए गए, जिनमें प्रमुख हैं—
बहराइच में 5 एकड़ भूमि पर महाराजा सुहेलदेव का भव्य पार्क और प्रतिमा
लखनऊ में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय की स्थापना
गाजीपुर से “सुहेलदेव एक्सप्रेस” ट्रेन का संचालन
दावा किया गया कि यह सभी कार्य भारतीय समाज पार्टी के आंदोलन और दबाव के कारण संभव हो सके। इससे पहले कांग्रेस, बसपा और भाजपा की सरकारें भी रहीं, लेकिन उस दौर में महाराजा सुहेलदेव को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
UGC नियमों सहित अन्य मुद्दों पर भी सरकार का रुख स्पष्ट
नेताओं ने यह भी कहा कि UGC के नए नियमों, जातीय जनगणना और अन्य समसामयिक मुद्दों पर सरकार का पक्ष पूरी तरह स्पष्ट है, और किसी भी निर्णय से पहले संवैधानिक प्रक्रिया और जनहित को प्राथमिकता दी जाएगी।
कुल मिलाकर, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे, अफवाहों की कोई गुंजाइश नहीं है और प्रदेश में विकास, कानून व्यवस्था व लोकतांत्रिक प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रहेगी।

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