सावन शिवरात्रि पर काशी में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, गंगा घाट से बाबा दरबार तक गूंजा “हर-हर बम बम”

वाराणसी। धर्म और आस्था की राजधानी काशी में सावन की पहली शिवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार और बुधवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोलेनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए काशी की हर सड़क, गली, घाट और मंदिरों की ओर श्रद्धालुओं का रेला नजर आया। पूरा शहर हर-हर महादेव और बोल बम के नारों से गूंज उठा। गंगा घाट से बाबा विश्वनाथ मंदिर तक भगवा रंग में रंगी आस्था की यह तस्वीर भव्य, दिव्य और अद्भुत रही।

हालांकि इस बार शिवरात्रि मंगलवार को प्रदोष काल के साथ पड़ने से मंगलवार और बुधवार दोनों दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दराज से आए कांवरियों ने गंगा घाट से पवित्र जल लेकर बाबा दरबार तक जलाभिषेक करने के लिए शहर की गलियों को भगवामय कर दिया।

कांवरियों की भीड़ से पटी रहीं सड़कें, घर से निकलना हुआ मुश्किल

शहर की प्रमुख सड़कों से लेकर तंग गलियों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आई। गिरजाघर चौराहा, गोदौलिया, दशाश्वमेध, महमूरगंज, भेलूपुर, रथयात्रा, कमच्छा, लक्सा, विनायका जैसे तमाम इलाके कांवरियों के रुकने, चलने और झांकियों के प्रदर्शन से पूरी तरह जाम रहे।

पक्का महाल क्षेत्र में तो हालात इतने गंभीर हो गए कि वहाँ के स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और कॉलेज जाने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक डायवर्जन लागू होने से लोगों का वाहन लेकर बाहर निकलना मुश्किल हो गया। यहाँ तक कि कई जगहों पर पैदल चलने पर भी रोक लगा दी गई थी।

ट्रैफिक डायवर्जन बना परेशानी की जड़

जिला प्रशासन द्वारा रविवार रात से सोमवार रात तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया था, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार और बुधवार को भी कई मार्गों पर आवागमन रोक दिया गया। गिरजाघर से गोदौलिया तक किसी भी आम नागरिक को वाहन से न ही जाने दिया जा रहा था।

इसके कारण स्थानीय निवासियों को अपने दैनिक कार्यों में काफी दिक्कतें हुईं। बच्चों को स्कूल छोड़ने या लाने वाले माता-पिता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोग तो रास्ते में ही पुलिस द्वारा रोक दिए गए और उन्हें वैकल्पिक मार्गों से जाना पड़ा, जो समय और दूरी दोनों के लिहाज से मुश्किल भरे थे।

दशाश्वमेध चौकी प्रभारी ने दिलाया राहत

स्थानीय नागरिकों की परेशानियों को देखते हुए दशाश्वमेध पुलिस चौकी प्रभारी अनुजमणि तिवारी ने मामले में त्वरित संज्ञान लिया। लोगों की शिकायत पर वे कांस्टेबल दिनेश सिंह और सचिन राव के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे। उन्होंने बांसफाटक वाले मार्ग पर लगी बैरिकेडिंग को हटवाया और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि स्थानीय नागरिकों और पक्का महाल वासियों को उनके वाहनों समेत इस मार्ग से जाने दिया जाए। इसके बाद ही इलाके में थोड़ी राहत मिली और लोगों की आवाजाही सामान्य हो सकी।

स्कूल-कॉलेजों के सामने जाम से छात्र-छात्राएं हुए प्रभावित

भीड़ और अव्यवस्थित वाहनों के कारण शहर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के सामने भीषण जाम लग गया। खासकर लक्सा, कमच्छा, भेलूपुर, विनायका और रथयात्रा जैसे क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेजों के बाहर कांवरियों के ट्रक, ट्रैक्टर, डीजे और झांकियों से सजे वाहन खड़े कर दिए गए, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया।

हालांकि इन इलाकों में नो एंट्री घोषित थी, फिर भी श्रद्धालुओं ने अपने भारी वाहन सड़क किनारे खड़े कर दिए जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो गई। स्कूल समय पर न पहुंच पाने के कारण कई बच्चों को देरी से स्कूल पहुंचना पड़ा। कुछ स्कूलों में तो बच्चों की एंट्री तक रोकी गई जब तक स्थिति सामान्य नहीं हुई।

पॉश इलाकों से लेकर मंदिर परिसर तक भगवा में रंगी काशी

काशी की गली-गली और कोना-कोना इस मौके पर भगवा रंग में रंगा नजर आया। पॉश कॉलोनियों से लेकर घाटों और मंदिरों तक आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्रद्धालु सिर पर कांवर रखे “बोल बम” और “हर हर महादेव” के उद्घोष के साथ चलते नजर आए।

विश्वनाथ धाम, काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, संकठा माता मंदिर, महमूरगंज स्थित बाबा वैद्यनाथ मंदिर और लंका क्षेत्र के कई प्रमुख शिवालयों में लंबी कतारें देखने को मिलीं।

इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क तो दिखा, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कांवरियों की आमद के सामने कई जगहों पर व्यवस्था चरमरा गई।

जहाँ एक ओर श्रद्धालु शिवभक्ति में डूबे रहे, वहीं दूसरी ओर आमजन के लिए ट्रैफिक प्रतिबंध, रास्ता बंद होने और अव्यवस्थित भीड़ की वजह से दैनिक कार्यों को निपटाना मुश्किल हो गया।

कांवरियों के लिए शिवभक्ति का उत्सव

इस बार की सावन शिवरात्रि काशी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बन गई जहाँ आस्था अपने चरम पर थी। लेकिन व्यवस्था की कमी और ट्रैफिक प्रबंधन की नाकामी ने आमजन को परेशान कर दिया।

सवाल यह भी उठता है कि भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के दौरान ट्रैफिक, पार्किंग और लोकल रेजिडेंट्स के लिए क्या बेहतर योजना बनाई जा सकती है ताकि श्रद्धालुओं की श्रद्धा भी बनी रहे और आम लोगों को भी परेशानी न हो।

सावन की पहली शिवरात्रि ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि काशी में आस्था कितनी गहरी है। लेकिन यह भी साफ हो गया कि इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए योजनाबद्ध और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ आम नागरिकों की दिनचर्या भी प्रभावित न हो, इसके लिए अगले आयोजनों में व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त बनाने की आवश्यकता है।

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