
वाराणसी(काशीवार्ता)।नवरात्रि के नौवें दिन, भक्तगण माता सिद्धिदात्री देवी के मंगला श्रृंगार दर्शन के लिए विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ एकत्रित होते हैं। माता सिद्धिदात्री देवी को नवरात्र के अंतिम दिन पूजा जाता है, जो साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाली देवी मानी जाती हैं।
मंगला आरती और श्रृंगार दर्शन का यह विशेष अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन देवी का मंगला श्रृंगार अत्यंत भव्य और दिव्य रूप से किया जाता है। देवी को लाल और सुनहरे वस्त्रों से सजाया जाता है, जो उनके तेज और दिव्यता को प्रतिबिंबित करते हैं। उनकी मस्तक पर सुनहरी मुकुट होता है, जिसमें रत्न और मोतियों की अद्भुत झलक देखने को मिलती है। माता को स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है, जिसमें हार, कर्णफूल और बाजूबंद सम्मिलित होते हैं।
मंदिर के गर्भगृह को भी विशेष रूप से फूलों और दीपों से सजाया जाता है, जिससे वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक और पूज्यनीय हो जाता है। भक्त माता के दिव्य रूप को निहारते हुए भक्ति और श्रद्धा से भरे होते हैं। माता के चरणों में लाल पुष्प, अक्षत, चंदन और धूप अर्पित किए जाते हैं।
श्रद्धालु सिद्धिदात्री देवी से मोक्ष, शांति और सुख की कामना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता सिद्धिदात्री की उपासना से मनुष्य को अष्ट सिद्धियों और नवनिधियों की प्राप्ति होती है। देवी का मंगला श्रृंगार दर्शन न केवल भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि उनके जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार भी करता है।