
प्रयागराज, 22 फरवरी 2025: महाकुंभ के विराट आयोजन में रेलवे ने तीर्थयात्रियों को सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाई। इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान रेलवे ने न केवल तीर्थयात्रियों को प्रयागराज पहुंचाने में मदद की, बल्कि ट्रेनों के संचालन और प्रबंधन में नए कीर्तिमान भी स्थापित किए।
विशेष ट्रेनों का संचालन
महाकुंभ के दौरान अब तक 13,667 ट्रेनें तीर्थयात्रियों को लेकर प्रयागराज और उसके अन्य स्टेशनों तक पहुंचीं। इनमें से 3,468 विशेष ट्रेनें कुंभ क्षेत्र से संचालित हुईं, 2,008 ट्रेनें बाहर से आईं, और 8,211 नियमित ट्रेनें थीं। प्रयागराज के प्रमुख नौ रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। अकेले प्रयागराज जंक्शन से 5,332 ट्रेनें चलाई गईं, जबकि अन्य स्टेशनों पर भी हजारों ट्रेनों का संचालन किया गया।
तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ का प्रबंधन
रेलवे ने अनुमानित तीर्थयात्रियों की संख्या के आधार पर ट्रेनों की योजना पहले से बनाई थी। भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारू यात्रा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने आपातकालीन योजनाएं भी लागू कीं। प्रयागराज क्षेत्र में अब तक 3.6 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं को रेलवे द्वारा संभाला गया।
देशभर से ट्रेनों की आवाजाही
रेलवे ने पूरे देश से तीर्थयात्रियों को प्रयागराज तक पहुंचाने में विशेष योगदान दिया:
- 50% ट्रेनें उत्तर प्रदेश से प्रयागराज पहुंचीं।
- 11% दिल्ली, 10% बिहार से, जबकि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात से 3-6% ट्रेनें आईं।
- असम से 180, और छत्तीसगढ़ से 101 ट्रेनें चलाई गईं।
महाकुंभ के लिए विशेष ट्रेन सेवाएं
महाकुंभ के दौरान तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 472 राजधानी और 282 वंदे भारत ट्रेनों का संचालन किया गया। कुल 92% ट्रेनें मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मेमू श्रेणियों की थीं।
रेलवे की ऐतिहासिक भूमिका
रेलवे ने कुंभ की भव्यता और दिव्यता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनुमान है कि पूरे आयोजन में 12 से 15 करोड़ तीर्थयात्रियों ने किसी न किसी रूप में रेलवे सेवाओं का लाभ उठाया। रेलवे के समर्पित प्रयासों ने महाकुंभ को सफल बनाने में अहम योगदान दिया, जिससे यह आयोजन सुगम और ऐतिहासिक बन गया।