महाकुंभ-2025: भारतीय संस्कृति और धरोहर का भव्य प्रतीक

विदेशी राजनयिकों ने किया महाकुंभ का अनुभव, भारतीय संस्कृति को बताया अद्भुत

महाकुंभ नगर, 1 फरवरी

महाकुंभ-2025 में शनिवार को विभिन्न देशों के राजनयिकों और विदेशी अतिथियों का भव्य आगमन हुआ। 118 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिव्य और भव्य महाकुंभ को देखकर अभिभूत हो उठा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और धरोहर का अद्वितीय प्रतीक है। प्रयागराज आकर इन अतिथियों ने स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस किया और महाकुंभ के दिव्य वातावरण का आनंद लिया।

विदेशी अतिथियों ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा इस विशेष यात्रा की व्यवस्था के लिए खुशी और आभार प्रकट किया। प्रयागराज पहुंचने पर इन राजनयिकों का भव्य स्वागत किया गया और उन्हें भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से परिचित कराया गया।

महाकुंभ: विश्व की अनूठी आध्यात्मिक विरासत

महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिकता का वैश्विक मंच भी है। इस आयोजन में दुनिया भर के लाखों श्रद्धालु, साधु-संत, विद्वान और पर्यटक एकत्रित होते हैं। विदेशी राजदूतों ने महाकुंभ की परंपराओं में भाग लिया और इसे एक अनोखा अनुभव बताया।

भारत में जापान के राजदूत केइची ओनो ने कहा,
“मुझे बहुत खुशी है कि राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय ने राजनयिकों के लिए इस यात्रा की व्यवस्था की है। महाकुंभ एक विशेष आयोजन है, खासकर इस साल। यह हिंदू संस्कृति को समझने का एक अनमोल अवसर है, जिसे मैं पूरी तरह अनुभव करना चाहता हूं।

भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो काउचिनो ने महाकुंभ के पारंपरिक रीति-रिवाजों में भाग लेते हुए अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा,
“मैं इस महत्वपूर्ण समारोह में भाग लेकर अत्यंत प्रसन्न हूं। यहां की परंपराओं का पालन करके बहुत आनंद महसूस कर रहा हूं। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिकता का प्रतीक है, बल्कि शांति और सौहार्द का संदेश भी देता है।”

महाकुंभ का आध्यात्मिक वातावरण: आत्मा को शुद्ध करने वाला अनुभव

भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविकिएने भी महाकुंभ में शामिल होकर अत्यंत उत्साहित दिखीं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा,


“मैं कई वर्षों से भारत से जुड़ी हुई हूं और हमेशा यहां आना चाहती थी। हालांकि, मुझे कभी भी किसी कुंभ मेले में जाने का अवसर नहीं मिला। यह मेरे लिए सौभाग्य का क्षण है कि इस बार मैं इस महान आयोजन का हिस्सा बन पाई हूं। यहां का वातावरण अत्यंत पवित्र और दिव्य है, जो आंखों और आत्मा को गौरव प्रदान करता है। मैं यहां पवित्र स्नान भी करूंगी, जो भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। निश्चित रूप से, महाकुंभ भारतीय धरोहर और संस्कृति को दर्शाता है, जिस पर गर्व होना चाहिए।”

विदेशी मेहमानों के लिए अविस्मरणीय अनुभव

महाकुंभ-2025 ने विदेशी मेहमानों को भारत की आध्यात्मिक समृद्धि, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकता का अद्वितीय अनुभव प्रदान किया। प्रयागराज में संगम तट पर उमड़े श्रद्धालुओं की भीड़, मंत्रोच्चारण, संतों के प्रवचन और अखाड़ों की पेशवाई ने विदेशी राजनयिकों को भारतीय संस्कृति के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराया।

यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक पहचान को उजागर करता है, बल्कि विश्व को भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता से जोड़ने का भी कार्य करता है। महाकुंभ-2025 में विदेशी अतिथियों की उपस्थिति भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।

TOP

You cannot copy content of this page