रामनाथ कोविंद ने महाकुम्भ को बताया आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक

महाकुम्भ 2025 के तहत संगम घाट पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने परिवार संग पवित्र स्नान किया। उनकी पत्नी और पुत्री भी उनके साथ रहीं। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने स्नान में सहयोग किया। पूजा-अर्चना के पश्चात रामनाथ कोविंद ने महाकुम्भ को भारत की आध्यात्मिक धरोहर और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बताया। उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की सराहना करते हुए इसे आर्थिक सुधार का महत्वपूर्ण कदम बताया।

कुमार विश्वास की कविता और सामाजिक समरसता का संदेश
प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने संगम में स्नान कर मां गंगा की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने अपनी कविता,
“तपस्वी राम के चरणों चढ़ी उपहार तक आई,
हमारी मां हमारे लोक के स्वीकार तक आई,”
से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत को विश्व गुरु बनाने की प्रेरणा देगा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा। डॉ. विश्वास ने गंगा को भारतीय संस्कृति का सार बताते हुए सभी से राजनीतिक भेदभाव छोड़ इस आयोजन में शामिल होने का आह्वान किया।
गौतम अदानी ने किया श्रद्धालुओं की सेवा
देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अदानी ने संगम स्नान के बाद इस्कॉन रसोई में सेवा करते हुए श्रद्धालुओं को भोजन परोसा। उन्होंने महाकुम्भ को “अद्भुत, अद्वितीय और अलौकिक” बताया। अदानी ने शासन-प्रशासन, सफाई कर्मियों और सुरक्षा बलों को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रयागराज आकर ऐसा लगता है जैसे पूरी दुनिया की आस्था और संस्कृतियां यहीं समाहित हो रही हैं। अदानी ने बड़े हनुमान मंदिर में दर्शन कर गीता प्रेस के पगोडा में श्रद्धालुओं से बातचीत की।
सुधा मूर्ति ने योगी आदित्यनाथ के कार्यों की सराहना की
राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति ने महाकुम्भ के दूसरे दिन भी पवित्र स्नान और तर्पण किया। उन्होंने इसे अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का संकल्प बताया। सुधा मूर्ति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महाकुम्भ के भव्य आयोजन की प्रशंसा करते हुए उनकी लंबी उम्र की कामना की।
महाकुम्भ: श्रद्धा, सेवा और समरसता का प्रतीक
महाकुम्भ 2025 न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक समरसता का उत्सव भी है। इसमें सभी वर्गों का योगदान इसे विश्व स्तर पर अद्वितीय और प्रेरणादायक बनाता है।