नवंबर में लखनऊ में लगेगा ‘कृषि भारत मेला’, नवाचारों को मिलेगा प्रोत्साहन

लखनऊ, 25 सितंबर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस नवंबर एक बड़े कृषि आयोजन की तैयारी हो रही है, जिसे ‘कृषि भारत मेला’ नाम दिया गया है। यह मेला 15 से 18 नवंबर के बीच आयोजित किया जाएगा और इसका उद्देश्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को प्रोत्साहित करना है। इस आयोजन की रूपरेखा उत्तर प्रदेश में हो रहे ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो’ की तर्ज पर बनाई गई है, और इसमें नीदरलैंड्स को पार्टनर कंट्री के रूप में सम्मिलित किया गया है।

200 से ज्यादा एक्जीबिटर्स और 1 लाख से अधिक किसान

मेले का आयोजन 20,000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में किया जाएगा, जिसमें 200 से अधिक प्रदर्शक (एक्जीबिटर्स) शामिल होंगे। आयोजनकर्ताओं के अनुसार, इस मेले में 1 लाख से अधिक किसान भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त, 4000 से अधिक बिजनेस विजिटर्स के भी इस मेले का हिस्सा बनने की संभावना है। यह आयोजन उत्तर प्रदेश के साथ-साथ 8 अन्य राज्यों के किसानों को भी आमंत्रित करेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में नए और उन्नत विचारों का आदान-प्रदान हो सके।

संगोष्ठियों और नवाचारों का केंद्र बिंदु

‘कृषि भारत मेला’ के दौरान 10 से अधिक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कृषि से जुड़े विशेषज्ञ, व्यवसायी, और नवाचारकर्ताओं के बीच संवाद होगा। इस मंच पर किसान और कृषि व्यवसाय से जुड़े लोग आपसी सहयोग के नए अवसरों को तलाश सकेंगे।

कृषि में नवाचारों को मिलेगा मंच

मेले का मुख्य आकर्षण प्रदेश में हो रहे कृषि नवाचारों का प्रोत्साहन होगा। विभिन्न नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनमें एग्रीकल्चर टूरिज्म, सस्टेनेबिलिटी जोन, फार्मर वेलनेस जोन और यंग फार्मर्स जोन जैसी थीम शामिल होंगी। इन स्टॉल्स के माध्यम से किसानों को कृषि में अपनाई जा रही नई तकनीकों और उपायों से अवगत कराया जाएगा।

किसानों और व्यवसायियों के बीच संवाद का मंच

यह मेला किसानों और कृषि व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक मंच प्रदान करेगा, जहां वे कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों और नवाचारों को समझ सकेंगे। किसानों को न केवल नई तकनीकें और उपकरण देखने का मौका मिलेगा, बल्कि वे अपने अनुभव साझा कर सकेंगे। इस आयोजन के जरिए प्रदेश की कृषि संभावनाओं को बढ़ावा देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और कदम उठाया जाएगा।

इस आयोजन के सफल आयोजन से उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है, जिससे भविष्य में कृषि के विकास के नए आयाम खुलेंगे।

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