वाराणसी।
प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध काशी, जिसे दुनिया वाराणसी और बनारस के नाम से भी जानती है, आज फिर अपने पुराने वैभव की ओर लौटती दिखाई दे रही है। बीते नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने काशी के समग्र, सतत और सुव्यवस्थित विकास पर विशेष ध्यान दिया है। धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों के संरक्षण के साथ ही आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जिससे यह शहर निवेश और विश्व पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।
विकास की नई रफ्तार
पिछले नौ वर्षों में काशी में सड़क, सेतु, पेयजल, सीवरेज, एसटीपी, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यटन, नगर विकास और पुलिस कल्याण से जुड़ी अनेक परियोजनाओं पर व्यापक कार्य हुआ है। लगभग 35,156 करोड़ रुपये की लागत से 486 प्रमुख परियोजनाएं पूरी कर आमजन को समर्पित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त करीब 17,915 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर तेजी से कार्य जारी है।
काशी के कायाकल्प के लिए कुल 53,071 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास हुआ है। इनमें से कई परियोजनाएं पूरी होकर जनता को समर्पित हो चुकी हैं, जबकि कई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, नई सड़कों और आधुनिक सुविधाओं के कारण शहर की तस्वीर तेजी से बदल रही है।
विश्व पर्यटन के मानचित्र पर उभरती काशी
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण काशी सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र रही है। बेहतर आधारभूत ढांचे और पर्यटन सुविधाओं के विकास का ही परिणाम है कि पिछले नौ वर्षों में काशी में 46 करोड़ 34 लाख से अधिक पर्यटक आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काशी की पहचान मजबूत हुई है। यहां काशी तमिल संगमम, G20 देशों की बैठक और शंघाई सहयोग संगठन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो चुका है। इन आयोजनों ने काशी को वैश्विक सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाई है।
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बना आकर्षण का केंद्र
काशी के धार्मिक पुनरुत्थान में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बने इस भव्य कॉरिडोर ने विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित किया है।
पहले जहां मंदिर परिसर लगभग 3 हजार वर्गफुट क्षेत्र में सीमित था, वहीं अब इसका विस्तार बढ़कर लगभग 5 लाख वर्गफुट तक हो चुका है। इससे श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिलने के साथ ही मंदिर परिसर अधिक व्यवस्थित और भव्य रूप में विकसित हुआ है।
धार्मिक यात्राओं और पावन पथ का विकास
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की गई हैं। पावन पथ परियोजना पर लगभग 24.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा तीनों अंतर्गृही यात्राओं के जीर्णोद्धार पर 3.08 करोड़ रुपये और पंचकोसी परिक्रमा यात्रा के पांच प्रमुख पड़ावों के विकास पर 39.23 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
काशी की परंपरागत यात्राओं जैसे काशी विष्णु यात्रा, द्वादश आदित्य यात्रा, नव दुर्गा यात्रा, अष्ट भैरव यात्रा, नव गौरी यात्रा और विनायक यात्रा के मार्गों का भी विकास किया गया है। इन मार्गों पर पड़ने वाले प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों को भी व्यवस्थित किया गया है।
घाटों और गलियों का सौंदर्यीकरण
काशी की पहचान उसकी गलियों और घाटों से है। शहर की प्राचीन गलियों का सौंदर्यीकरण कर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है।
इसके साथ ही गंगा तट के घाटों को भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाया गया है। कई घाटों का पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण किया गया है।
रामनगर और सामनेघाट क्षेत्र में शास्त्रीय घाटों का पक्का निर्माण किया गया है। वहीं कई स्थानों पर चेंजिंग रूम, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की गई है, जिससे घाटों की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा और अधिक बढ़ी है।
धार्मिक स्थलों का व्यापक विकास
काशी और उसके आसपास स्थित कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों का भी विकास किया गया है। इनमें मारकंडेय महादेव मंदिर, संत रविदास जन्मस्थली, स्वर्वेद ध्यान केंद्र, रामेश्वर मंदिर और चंद्रावती जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।
जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर चंद्रप्रभु की जन्मस्थली चंद्रावती में भी पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
इसके अतिरिक्त विभिन्न मंदिरों, तालाबों और कुंडों का भी जीर्णोद्धार किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के धार्मिक स्थलों को भी नई पहचान मिली है।
सारनाथ का पर्यटन पुनर्विकास
भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का भी व्यापक विकास किया गया है। सारनाथ को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिहाज से और अधिक आकर्षक और सुविधाजनक बनाया गया है।
विश्व बैंक के सहयोग से 72.63 करोड़ रुपये की लागत से यहां विभिन्न विकास कार्य किए गए हैं। प्रो-पुअर प्रोजेक्ट के तहत क्षेत्र को टूरिस्ट फ्रेंडली बनाया गया है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक यहां रुकें और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें।
सारनाथ में लाइट एंड साउंड शो, बुद्धा थीम पार्क और अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास से यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बन गया है।
कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे का विस्तार
काशी को जल, थल और नभ तीनों मार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सड़कों का चौड़ीकरण, रिंग रोड और फ्लाईओवर का निर्माण, व्यवस्थित पार्किंग और जल परिवहन की सुविधा से यातायात व्यवस्था अधिक सुगम हुई है।
इसके अलावा लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के विस्तार का कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
आस्था, संस्कृति और विकास का संगम
बीते नौ वर्षों में काशी के विकास का जो मॉडल सामने आया है, उसमें आस्था, संस्कृति और आधुनिक विकास का संतुलित समावेश देखने को मिलता है।
प्राचीन मंदिरों, धार्मिक यात्राओं और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
यही कारण है कि आज काशी न केवल भारत की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है, बल्कि विश्व पर्यटन के मानचित्र पर भी तेजी से उभरती हुई दिखाई दे रही है।
