
गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी कूप को महज एक संरचना नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति का माध्यम और भगवान विश्वनाथ का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि काशी में स्थित इस स्थल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है, और यह भगवान शिव की कृपा का प्रतीक है। यह विचार उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र के दौरान व्यक्त किए। यह कथा युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 55वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 10वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी।
मुख्यमंत्री ने आदि शंकराचार्य की काशी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान विश्वनाथ ने उन्हें चंडाल रूप में दर्शन दिए थे, जिससे उन्होंने अद्वैत और ब्रह्म के संबंध में ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि भगवान किस रूप में दर्शन देंगे, यह कोई नहीं जानता।
कथा के महत्व पर बल
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण और अन्य कथाएं भारत की समृद्ध परंपरा, प्राचीनता, संस्कृति और इतिहास पर गर्व करने की अनुभूति कराती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा सनातन धर्म में बसती है, और यह धर्म सामाजिक एकता और राष्ट्रीय एकात्मता का आधार है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत के मठ और मंदिर केवल उपासना स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीयता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण से निकले संतों, जैसे आदि शंकराचार्य और रामानुजाचार्य, ने देश के विभिन्न हिस्सों में धर्म जागरण और सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया।
संत परंपरा और राष्ट्रीय एकता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संतों की परंपरा ने भारत को एकता के सूत्र में बांधा है। उन्होंने महायोगी गुरु गोरखनाथ समेत आचार्यों, संतों और ऋषियों की परंपरा का उल्लेख किया, जिन्होंने भारत को एक सांस्कृतिक इकाई के रूप में जोड़े रखा। उन्होंने कहा कि यह संतों की परंपरा ही है जो उत्तर और दक्षिण के लोगों को आपस में जोड़ती है, जैसे गंगोत्री का जल रामेश्वरम तक और रामेश्वरम का जल केदारनाथ तक पहुंचता है।
कथाओं से जीवन की प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण जैसी कथाएं जीवन को समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच हजार वर्षों से इन कथाओं ने अनगिनत लोगों के उद्धार का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कथा के आयोजकों और कथा वाचक काशीपीठाधीश्वर डॉ. रामकमल दास वेदांती जी का आभार भी व्यक्त किया।
कथा के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यास पीठ की पूजा की और आरती उतारी। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, महंत नारायण गिरी समेत कई संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।