अटल अखाड़े की भव्य छावनी यात्रा: अनुशासन और परंपरा का अद्भुत संगम

महाकुंभ क्षेत्र में पहुंचे श्री शंभू पंचदशनाम अटल अखाड़ा
प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित महाकुंभ में सनातन धर्म के 13 प्रमुख अखाड़ों का प्रवेश जारी है। बुधवार को श्री शंभू पंचदशनाम अटल अखाड़ा ने महाकुंभ क्षेत्र में अपनी छावनी की भव्य प्रवेश यात्रा निकाली। इस यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने परंपरा और भव्यता का अद्भुत नजारा देखा।

भगवान गणपति के साथ छावनी में हुआ प्रवेश
अटल अखाड़े ने अपने इष्ट देव भगवान गजानन की शोभायात्रा के साथ कुंभ क्षेत्र में प्रवेश किया। यह यात्रा अलोपी बाग स्थित अखाड़े के मुख्यालय से प्रारंभ होकर कुंभ क्षेत्र के सेक्टर 20 तक पहुंची। शैव संन्यासियों के इस अखाड़े की स्थापना छठी शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी। यात्रा में भगवान गणपति की सवारी, परंपरागत देवताओं और नागा संन्यासियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

नागा संन्यासियों और संन्यासिनियों ने बटोरी आस्था
अखाड़े की प्रवेश यात्रा में नागा संन्यासियों का अनुशासन और उत्साह देखने लायक था। इष्ट देवता गणपति के पीछे पारंपरिक देवता और फिर नागा संन्यासी अनुशासनबद्ध चल रहे थे। इस बार नागा संन्यासिनियों और बाल नागा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण रही। यात्रा में लगभग दो दर्जन महा मंडलेश्वर और 200 से अधिक नागा संन्यासी शामिल हुए।

“सूर्य प्रकाश” भाले की अद्वितीय छटा
यात्रा में अखाड़े के इष्ट भाले “सूर्य प्रकाश” की विशेष झलक देखने को मिली। इस भाले को अखाड़े के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह केवल प्रयागराज के महाकुंभ में ही आश्रम से बाहर निकलता है। फूलों से सजे इस भाले ने श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण पैदा किया।

प्रशासन ने पुष्प वर्षा से किया स्वागत
अटल अखाड़े की यात्रा ने पांच किमी का रास्ता तय कर महाकुंभ क्षेत्र में प्रवेश किया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर महाकुंभ मेला प्रशासन ने पुष्प वर्षा कर संतों का भव्य स्वागत किया। रथों पर सवार संतों और महामंडलेश्वर से आशीर्वाद लेने के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।

इस भव्य यात्रा ने महाकुंभ में धर्म, परंपरा और आस्था का संदेश दिया और अटल अखाड़े की गरिमा को एक नई ऊंचाई प्रदान की।

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