बनारसी कशीदाकारी की चमक में खोए विदेशी मेहमान

बुनाई की बारीकियों ने खींचा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का ध्यान

पितांबरी, सुविधा व धानुका सिल्क के स्टॉल रहे आकर्षण प्रमुख केंद्र

वाराणसी (काशीवार्ता)। होटल ताज में आयोजित आईआईए इंटरनेशनल टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी एक्सपो में बनारसी कारीगरी की अनूठी चमक ने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जापान, दक्षिण अफ्रीका, बुर्किनाफासो, वेनेजुएला समेत कई देशों से आए प्रतिनिधि बनारसी सिल्क की महीन बुनाई और कशीदाकारी में रचे सौंदर्य से जैसे अभिभूत हो उठे।

पितांबरी, सुविधा साड़ी घर और धानुका सिल्क के स्टॉलों पर उमड़ी भीड़ में विदेशी मेहमान भी शामिल थे, जो हर धागे और हर डिजाइन में बसी सदियों पुरानी विरासत को अपनी आँखों में समेटते नज़र आए। यह दृश्य मानों बनारसी शिल्प के स्वर्णिम इतिहास से आज का पुल जोड़ रहा था।

पुरातन काशी की पावन धरती पर 18 व 19 दिसंबर को आईआईए इंटरनेशनल टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी एक्सपो मानो किसी स्वप्न-लोक सा साकार हुआ। दीप-दीप झिलमिलाते स्टॉलों के मध्य अंतरराष्ट्रीय संवाद और कारीगरी की महक गंगा-सी बहती रही। उद्देश्य स्पष्ट था वाराणसी को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रतिष्ठापित करना, निवेश को स्वर देना और एमएसएमई उद्यमों में नव-उल्लास जगाना।

एक्सपो में जापान, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, वेनेजुएला, गुयाना, बुर्किनाफासो आदि देशों से आए विशिष्ट प्रतिनिधियों ने काशी की सांस्कृतिक शिरा को स्पर्श किया। बुर्किनाफासो के मंत्री-परामर्शदाता चिस्तीओं डिडलीर ज़िंक्वा क्वात्तरा, दक्षिण अफ्रीका के फर्स्ट सेक्रेटरी खथुट्सथेलो थकवांग, जापान के जीरा कोडेरा सहित अनेक विदेशी अतिथि कारीगरी की लय में खोते दिखे। स्थानीय उद्यमियों में आरके चौधरी, केशव तिवारी, धरम कुमार, अनरुद्ध क्षत्रिय, आलोक अग्रवाल, दीपक कुमार बजाज, अनिल के. जजोदिया ने बनारसी उद्योग की थाती को वैश्विक पटल पर रखने का संकल्प दोहराया।

पितांबरी स्टॉल : रेशम-सी कोमल रोशनी में बिखरती कारीगरी

रंग-बिरंगे पितांबरी स्टॉल पर आते ही आगंतुक क्षणभर ठिठक जाते। मानो बनारसी सिल्क की डोरियां श्वासों में संगीत घोल देती हों। ओनर शिवा कुमार ने बताया—“बनारसी सिल्क पर आधारित लेडीज सूट और सदाबहार साड़ियों का आकर्षण देखते ही बन रहा है।” सीमित स्टॉक होने पर भी जिज्ञासा उफनती रही। लोग शो रूम का पता लेकर वहीं पहुँचने की इच्छा जताते रहे।

सुविधा साड़ी घर : जरी की लहरों में झिलमिलाता सौंदर्य

स्टॉल पर सजे जरीदार लेडीज सूट मानो चाँदनी-सी चमक बिखेरते थे। आरजू कुमार ने बताया कि देश-विदेश से आए आगंतुकों की पहली निगाह बनारसी सिल्क पर टिक रही थी। कुछ अतिथि तो शो रूम तक जाने का निश्चय करते दिखाई दिए।

धानुका सिल्क एंड स्टोर : संतोष के स्वर और संस्कृति की गूँज

प्रोपराइटर गौरी शंकर धानुका के अनुसार, हर आगंतुक संतुष्ट होकर लौटा—मानो कारीगरी की आत्मा उनके अंतर्मन में उतर गई हो। साड़ी और सूट का क्रेज चरम पर रहा।

स्वाद से तृप्त किया बनारसी खानपान

125 से अधिक स्टॉलों के बीच बनारसी खानपान भी अपने स्वाद से तृप्त करता रहा—कचौड़ी, जलेबी, चाट, इमरती, समोसे, मिठाइयों की सुगंध मानो हवा में रंग घोल रही थी। पूर्वांचल की कारीगरी से जुड़े खिलौने, सोलर सिस्टम, टाइल्स, कालीन और सजावटी उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। 5000 से अधिक आगंतुकों की भीड़, संस्कृतिसिक्त संवाद और निवेश के नए सूत्रों के साथ यह एक्सपो उत्तर प्रदेश की पर्यटन-अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने की क्षमता लेकर आया। बीएचयू सहित विभिन्न संस्थाओं का सहयोग इस यात्रा में प्रेरक बना।

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