
चोपन (सोनभद्र)। गिरते भूजल स्तर और भविष्य की जल उपलब्धता को लेकर चोपन विकास खंड सभागार में स्थानीय भूजल प्रबंधन विषय पर जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड, उत्तरी क्षेत्र, लखनऊ के तत्वावधान में हुआ, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, वैज्ञानिकों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भूजल संरक्षण को जमीनी स्तर पर लागू करने को लेकर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में संभावित भविष्य की जल समस्याओं, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समाधान, वर्षा जल संचयन, रिचार्ज संरचनाओं के निर्माण और पंचायतों की सक्रिय भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने कहा कि भूजल प्रबंधन अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यक जिम्मेदारी बन चुका है।
कार्यक्रम में उपायुक्त श्रम एवं रोजगार सोनभद्र रवींद्र वीर, खंड विकास अधिकारी चोपन अजीत यादव और सहायक विकास अधिकारी पंचायत काशीराम ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि भूजल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
इस दौरान मनरेगा के तकनीकी सहायक, ग्राम रोजगार सहायक, ग्राम प्रधान, पंचायती राज विभाग, डीआरडीए सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम में 125 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें 20 से ज्यादा महिलाओं की उपस्थिति ने बढ़ती जागरूकता को दर्शाया।
संवाद के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भूजल स्तर गिरने, जल स्रोत सूखने और अनियंत्रित जल दोहन जैसी समस्याओं पर गंभीर चर्चा हुई। केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान के साथ व्यवहारिक सुझाव भी साझा किए।
वैज्ञानिक-डी जगदंबा प्रसाद और सहायक भूजल वैज्ञानिक अवधेश कुमार ने प्रतिभागियों से सीधे संवाद कर भूजल प्रबंधन के वैज्ञानिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया। वहीं वैज्ञानिक-सी मुकेश आनंद ने वर्ष 2024-25 के दौरान दुद्धी, बभनी और मयोरपुर विकास खंडों में किए गए राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण अध्ययन के निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अध्ययन भविष्य की जल प्रबंधन योजनाओं और नीतिगत फैसलों में उपयोगी रहेगा।
कार्यक्रम का आयोजन क्षेत्रीय निदेशक प्रभारी संदीप कुमार स्वरूप और वैज्ञानिक-डी डॉ. रंजीत कुमार प्रसाद के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
