
विश्व के किसी भी कोने से एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की मिलेगी सुविधा
वाराणसी (काशीवार्ता)। प्राच्य विद्या के संरक्षण में जुटा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय अब मंदिर प्रबंधन में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई भी होगी। आनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र के तहत मंदिर प्रबंधन में दाखिले के लिए पंजीकरण एक अप्रैल से 15 मई तक होगा। मंदिर प्रबंधन एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स को घर बैठे देश-विदेश के किसी भी कोने से किया जा सकता है। परीक्षा देने के लिए विश्वविद्यालय नहीं आना होगा। पढ़ाई ही नहीं परीक्षाएं भी आनलाइन होंगी। उक्त जानकारी संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने रविवार को योग साधना केंद्र के संवाद कक्ष में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान दी। कहा कि संस्कृत प्राचीन काल से ही सनातन धर्म पर अनेक ग्रंथ उपलब्ध है। इसमें वास्तु शास्त्र विधि से मंदिर का निर्माण, भगवान के मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा, शास्त्रीय विधि से पूजा-पाठ की पद्धति सहित तमाम जानकारियां उपलब्ध है। ग्रंथों में मंदिर प्रबंधन की बात देखने को नहीं मिलती है। वर्तमान दौर में मंदिर प्रबंधन की महत्ता काफी बढ़ गई है। इसे देखते हुए मंदिर प्रबंधन नामक कोर्स शुरू किया जा रहा है। इसमें मंदिर से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का अध्ययन होगा। इसमें मंदिर का प्रबंधन, संचालन, वित्तीय प्रबंधन सहित अन्य पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा मंदिर प्रबंधन में तकनीकी का उपयोग, प्रचार-प्रसार, अफवाहों पर नजर रखने के तरीके, विशेष पर्वों में पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, मंदिर में प्राप्त होने वाले दान व खर्च के अनुपात बनाने का तरीका भी पढ़ाया जाएगा ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे।