
वाराणसी (काशीवार्ता)। कोतवाली थाना क्षेत्र में सोमवार को एक जर्जर मकान के ढहने से स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। पत्थर गली में स्थित मकान का आगे का हिस्सा अचानक धराशायी हो गया। यह हादसा सुबह लगभग 10:30 बजे हुआ, लेकिन राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
घटना के तुरंत बाद एसीपी कोतवाली, ईशान सोनी और कोतवाली थाना प्रभारी राजीव सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया, जिसने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया। हादसे के कारण कई वाहन मलबे में दब गए, जिससे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मकान काफी पुराना था और इसके मालिक रामचंद्र ठाकुर को नगर निगम द्वारा पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। नगर निगम ने भवन मालिक को जर्जर स्थिति के बारे में सूचित किया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
रामचंद्र ठाकुर ने कहा, “मुझे मकान की जर्जर स्थिति का अंदाजा था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इसे समय पर ठीक नहीं कर पाया।” उन्होंने बताया कि लंबे समय से इस मकान में तीन किराएदार अपने परिवारों के साथ रह रहे थे।
जब यह हादसा हुआ, उस समय सभी निवासी भवन के पिछले हिस्से से पड़ोसी के घर में सुरक्षित चले गए थे, जिससे उनकी जान बच गई। इस घटना ने जर्जर भवनों की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम से अपील की है कि वह जर्जर भवनों की पहचान कर उन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया तेज करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। वाराणसी में इस तरह के हादसे पहले भी होते रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से इस पर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस घटना ने सभी को एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत का एहसास दिलाया है। कई लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या ऐसे जर्जर भवनों के रहते उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित है? स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह अब सख्त कदम उठाए और भविष्य में होने वाले संभावित खतरों से बचने के लिए उचित कार्रवाई करे।