बीएचयू की एक्जीक्युटिव काउंसिल में राजनीतिक नियुक्तियों पर उठे सवाल, मेयर की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया-कांग्रेस नेता संजीव सिंह

वाराणसी, 26 जुलाई 2025।

श्रद्धेय शिक्षाविद और पूर्व कुलपति कालूलाल श्रीमाली पर वाराणसी के मेयर अशोक कुमार तिवारी की टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। यह टिप्पणी न केवल मेयर की शिक्षा और शिक्षाविदों के प्रति सूक्ष्म समझ पर सवाल उठाती है, बल्कि बीएचयू जैसी प्रतिष्ठित संस्था की परंपरा और गरिमा को भी ठेस पहुंचाती है।

बीएचयू के 100 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में सत्ता किसी भी दल की रही हो, कभी भी स्थानीय निकायों के पदाधिकारियों को राजनीतिक लाभ के लिए एक्जीक्युटिव काउंसिल (ईसी) का सदस्य नहीं बनाया गया था। परंतु वर्तमान में जिस प्रकार से ईसी का “संघीकरण” किया गया है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और बीएचयू की संस्थागत स्वतंत्रता के लिए खतरे की घंटी है।

सवाल यह है कि भाजपा से जुड़े जिन राजनैतिक पदाधिकारियों को ईसी में नामित किया गया है, क्या उन्होंने शिक्षा जगत में ऐसा कोई योगदान दिया है जो उन्हें इस पद के योग्य बनाता है?

इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता संज़ीव सिंह ने कहा—
“मेयर अशोक तिवारी की टिप्पणी न केवल उनके पद की गरिमा को गिराती है, बल्कि बीएचयू के गौरवशाली परंपरा में कुलपति रहे श्रद्धेय कालूलाल श्रीमाली का भी अपमान करती है। श्रीमाली न केवल देश के द्वितीय शिक्षामंत्री रहे, बल्कि एक अद्वितीय शिक्षाविद भी थे। उनके जैसे विद्वानों के पदचिन्हों पर चलने वाले महामना मालवीय, डॉ. राधाकृष्णन और आचार्य नरेंद्र देव जैसे महान शिक्षाविदों का भी अप्रत्यक्ष रूप से अपमान हुआ है।”

अब तक बीएचयू की एक्जीक्युटिव काउंसिल में कभी कोई महापौर या दल का क्षेत्रीय पदाधिकारी सदस्य नहीं रहा, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियों से यह परंपरा भी टूटी है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और पार्टी ने यह मांग की है कि महामना की उस वैश्विक सोच और शिक्षा दर्शन का सम्मान बरकरार रखने के लिए ईसी से सभी राजनीतिक नियुक्तियों को तत्काल हटाया जाए, और उनकी जगह योग्य शिक्षाविदों और विद्वानों को नामित किया जाए। यह विश्वविद्यालय की गरिमा और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जरूरी कदम है।

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