गणतंत्र दिवस पर सीएम योगी आदित्यनाथ का संबोधन: संविधान से प्रेरणा लेकर विकसित भारत का संकल्प

लखनऊ, 26 जनवरी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने सरकारी आवास पर ध्वजारोहण किया और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान न्याय, समता और बंधुता के साथ जुड़ने की प्रेरणा देता है। यह संविधान सम और विषम परिस्थितियों में देश को एकता के सूत्र में बांधने में सफल रहा है।

संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा

मुख्यमंत्री ने भारत के संविधान निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश ने 26 जनवरी 1950 को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। उन्होंने संविधान सभा, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य महान नेताओं के योगदान को श्रद्धांजलि दी, जिनकी बदौलत हमें एक समावेशी और प्रगतिशील संविधान मिला।

संविधान: अमृतकाल की ओर बढ़ने का मार्ग

सीएम योगी ने कहा कि 75 वर्षों की यह यात्रा हमें अमृतकाल की ओर ले जाती है। संविधान हमें बिना भेदभाव के न्याय, समानता और बंधुत्व का संदेश देता है। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और संविधान के कारण हर नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि जब विश्व के कई लोकतांत्रिक देशों में महिलाओं और वंचित वर्गों को मतदान का अधिकार नहीं था, तब भारत ने यह अधिकार पहले दिन से सुनिश्चित किया।

विकसित भारत का निर्माण

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत के लिए दिए गए 25 वर्षों के संकल्प का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सभी नागरिक संविधान के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, तो भारत निश्चित रूप से एक विकसित राष्ट्र बनेगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की जनकल्याणकारी योजनाओं को “आधुनिक रामराज्य” का स्वरूप बताया, जिनसे करोड़ों गरीब, किसान और वंचित वर्गों को लाभ मिला है।

संविधान: प्रेरणा और प्रगति का मार्गदर्शक

सीएम योगी ने कहा कि संविधान जाति, धर्म, भाषा और लिंग के भेदभाव के बिना हर नागरिक को समान अधिकार देता है। उन्होंने इसे भारत की संस्कृति की गहराई और ऊंचाई का प्रतीक बताया।

संविधान के मूल्यों से प्रेरणा लें

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे संविधान के मूल्यों का अनुसरण करें और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें। उन्होंने कहा कि यही प्रयास भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ले जाएगा।

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