वाराणसी (काशीवार्ता)। दावा है 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में छावनी अंतर्गत आने वाला इलाका मिंट हाउस 24 घंटे बिजली के लिए तरस गया। बुधवार की दोपहर तेज आंधी-पानी व आकाशीय बिजली चमकने के बाद गुम हुई बिजली गुरुवार की दोपहर 3 बजे के बाद आ सकी। चौकाने वाली बात यह है कि बिजली कटी होने की खबर संबंधित उपकेंद्र तक को नहीं थी।
मिंट हाउस के अंतर्गत आने वाले तमाम व्यवसायी व कार्यालयों के लोग सुबह जब अपने-अपने संस्थानों में पहुंचे तो वहां बिजली गुम मिली। हालात ये थे कि इन्वर्टर तक जवाब दे गये। घंटों से गायब बिजली के चलते आज पूरा दिन लोगों का बेकार हो गया। तमाम शिकायतों व भागदौड़ के बाद किसी तरह से बिजली विभाग ने रहम कर दोपहर 3 बजे के बाद विद्युत आपूर्ति सूचारु की।
वहीं काशीवार्ता प्रतिनिधि ने खुद इस संबंध में अधिशासी अभियंता व उपखंड अधिकारी से बातचीत की व आपूर्ति सामान्य करने की बात कही। बावजूद इसके कई घंटे लग गये फाल्ट को ठीक करने में। सवाल यह उठता है कि लखनऊ में बैठे उच्चाधिकारी 24 घंटे विद्युत आपूर्ति का दावा करते हैं, साथ ही फाल्ट को जल्द से जल्द ठीक करने की भी हिदायत देते हैं, लेकिन क्या फाल्ट इतना बड़ा था कि उसे ठीक करने में बिजली विभाग के कर्मियों को 24 घंटे लग गये? उपभोक्ता इस दौरान किस मानसिक पीड़ा से गुजरा इसका किसी से कोई लेना-देना नहीं। परेशानहाल व्यापारी यहां तक कहते सुने गये कि स्मार्ट सिटी में 24 घंटा बिजली न देना भी कोई गुनाह नहीं है। 4 जून को आये लोकसभा चुनावों के परिणाम से यदि सबक नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में भाजपा के लिए ऐसे विभाग खलनायक की भूमिका निभा सकते हैं।