चार दशक से “बाबा” ने कर रखा था करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा

नगर निगम ने सारनाथ में अपनी बेशकीमती जमीन को कब्जे से कराया खाली, तोड़ा अवैध निर्माण

विशेष प्रतिनिधि

वाराणसी (काशीवार्ता)। नगर निगम ने पिछले कुछ महीनों से भूमाफियाओं के ख़िलाफ जो मुहिम छेड़ी है उसमें नित नए हैरतअंगेज मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला सारनाथ के बरईपुर क्षेत्र का है। यहाँ एक भूमाफिया पिछले लगभग चालीस साल से अरबों की सरकारी जमीन पर काबिज था। यही नहीं उसने नगर निगम में नाम दर्ज कराकर पीला कार्ड भी हासिल कर लिया था। मजे की बात तो यह है कि भूमाफिया ने अपने बचाव में दीवानी न्यायालय में मुकदमा भी दायर कर रखा था। करीब दो दशक बाद जब अदालत ने नगर निगम के हक में फैसला दिया तब निगम की टीम ने मौके पर जाकर भूमाफिया के अवैध निर्माण को ध्वस्त किया।

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हैरानी की बात है कि भूमाफिया ने इसी जमीन पर पिछले दिनों भंडारे का आयोजन किया और नगर आयुक्त को ही इसमें आने का न्योता दे डाला। जब अधीनस्थों ने नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को वस्तुस्थिति से अवगत कराया तो वे बहुत उखड़ गए और भूमाफिया को जमकर फटकार लगायी।

बरसो पहले इसी जमीन पर पूर्वप्रधानमात्री चंद्रशेखर का सम्मेलन कराया

मौजा बरईपुर क्षेत्र में अराजी नंबर 171 जमीन भीटा के रूप में दर्ज है। नब्बे के दशक की शुरुआत में इस जमीन पर गुप्तेश्वर सिंह शास्त्री नामक एक व्यक्ति जो अपने को साधु बताता है, काबिज हो गया। कब्जे को पुख्ता करने के लिए यहाँ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का एक बड़ा समाजवादी सम्मेलन कराया गया। जो कई दिनो तक चला, इसमें हज़ारों लोग शामिल हुए। खाने पीने से लेकर सारा इंतज़ाम धनबाद के चर्चित सूरजदेव सिंह के जिम्मे था।

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