अश्वगंधा की खेती मरीज को आरोग्य एवं किसानों को बनाएगी आर्थिक सशक्त

आयुष मंत्रालय ने प्रतिमा चैरिटेबल फाउंडेशन को सौंपी जिम्मेदारी

वाराणसी-(काशीवार्ता)-आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय औषधि पादप बोर्ड नई दिल्ली के माध्यम से अब आयुर्वेदिक (औषधीय) पौधों की पहुंच घर-घर तक बनाने का बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में औषधीय गुणों का खजाना ‘अश्वगंधा’ का कैंपेन शुरू होने जा रहा है। इसके लिए आयुष मंत्रालय ने वाराणसी की प्रतिमा चैरिटेबल फाउंडेशन (पीसीएफ) को जिम्मेदारी सौंपी है। फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि पीसीएफ एक दशक से ज्यादा समय से भारतीय विरासत, विज्ञान को बढ़ाने के साथ शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, शोध कार्य, स्वास्थ्य शिविरों के साथ मधुमेह, अस्थमा के अलावा महिला कल्याण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। अब अश्वगंधा को लेकर कृषि जागरूकता अभियान शुरु किया जा रहा है। जिसके तहत जहां किसानों को इसके फायदे बताये जायेंगे वहीं हर घर को इससे जोड़ने के लिए गमलों में भी इसे रोपा जायेगा ताकि घरों में हरियाली के साथ ही एक शुद्ध औषधि भी उन्हें बिना पैसा खर्च – किये मिल जाएगी। इस अभियान से पूर्वांचलभर के लोगों को जोड़ा जायेगा। उन्होंने बताया कि इसकी खेती करके किसान जहां लोगों को औषधि उपलब्ध कराकर लोगों को जीवनदान देने का पुण्य अर्जित करेंगे वहीं उन्हें इस औषधि के बदले अच्छी खासी आमदनी भी होगी। अश्वगंधा की खेती के फायदे: अश्वगंधा के कई तरह के औषधीय इस्तेमाल के कारण इसकी मांग हमेशा रहती है। इसकी जड़ से लेकर फल, बीज और छाल का प्रयोग दवाइयां बनाने में होती है। इसकी खेती कर किसान धान, गेहूं, मक्का की खेती के मुकाबले अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। यूपी बिहार की जलवायु भी इसके अनुकूल है। पूरी फसल तैयार होने में कुल पांच से छह माह लगते हैं।
किन रोगों में अश्वगंधा सेवन फायदेमंद : शक्तिवर्धक, मानसिक स्वास्थ्य, मोटापा, शारीरिक क्षमता बढ़ाने में, शुगर नियंत्रण में, पुरुष प्रजनन क्षमता बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि, त्वचा और बालों के लिए वरदान, थायरायड हार्मोन सुधार, कोलस्ट्रोल नियंत्रण व कैंसर में भी कारगर है।

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