छह साल बाद बीएचयू के एनेस्थीसिया प्रोफेसर पर कोर्ट के आदेश से हत्या का मुकदमा दर्ज

वाराणसी(काशीवार्ता)। अहरौरा डैम में वर्ष 2019 में हुई एक युवक की संदिग्ध मौत के मामले में छह साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। न्यायालय के आदेश पर रोहनिया थाने में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ट्रॉमा सेंटर के एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश मीणा के खिलाफ हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

यह मामला 30 जुलाई 2019 को अहरौरा डैम में डूबने से हुई जितेंद्र यादव की मौत से जुड़ा है। उस समय पुलिस जांच में इस घटना को दुर्घटना मानकर केस बंद कर दिया गया था। हालांकि मृतक के भाई धर्मेंद्र यादव पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर मामले की दोबारा जांच और मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

बताया जा रहा है कि 28 जनवरी को वाराणसी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर दोबारा प्रार्थना पत्र दिया गया। इसके बाद 6 फरवरी को न्यायालय ने रोहनिया थाना प्रभारी को तत्काल मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेश के बाद रोहनिया पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 238(ए) और 351(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

प्रार्थी धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया है कि उनके भाई जितेंद्र यादव एक अस्पताल में कार्यरत थे, जहां डॉ. मीणा एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दे रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान डॉ. मीणा के एक नर्स के साथ कथित आपत्तिजनक वीडियो जितेंद्र यादव के पास आ गए थे। आरोप के अनुसार वीडियो को लेकर दबाव बनाया गया और इसी विवाद में हत्या की साजिश रची गई।

फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की सच्चाई जांच और साक्ष्यों के आधार पर सामने आएगी।

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