
रामनगर(वाराणसी) काशीवार्ता। रामनगर का ऐतिहासिक काशी नरेश की मन्नत का दुलदुल का जुलूस मुहर्रम की पांच तारीख शुक्रवार की देर रात निकाला गया।यह जुलूस गोलाघाट स्थित इमामबाड़ा से बाबू खान और ताऊ खान की देखरेख में निकाला गया। गंगा जमुना की तहजीब की एक अनोखी मिसाल कायम करने वाला काशी नरेश की मन्नत का दुलदुल जुलूस बहुत ऐतिहासिक है। इस दुलदुल के जुलूस में एकता भाईचारे का आपसी प्रेम साफ दिखाई देता है। जिसमें मुस्लिम – हिन्दू, सिख समाज के लोग मिलजुल कर दुलदुल का जुलूस में शामिल होते हैं। गोलाघाट इमामबाड़े से दुलदुल का जुलूस जैसे ही सज-धज कर इमामबाड़ा से बाहर निकलता है। वैसे जियारत के लिए जगह-जगह खड़ी महिलाएं अपनी अपनी मन्नतें मानती है । मन्नत पूरी होने पर दुलदुल को
चांदी के नीबू चढ़ाती है और दुलदुल को दूध पिलाती है। जुलूस में सबसे आगे अलम लिए लोग चल रहे थे। ढोल ताशा बजता हुआ चल रहा था। जुलूस में शामिल लोग नोहा ख्वानी करते हुए चल रहे थे। जुलूस अपने पारंपरिक रास्तो के से सब्जी मंडी, चौक होते हुए पंचवटी स्थित कर्बला पहुंच कर जुलूस को डंडा किया गया। दुलदुल के जुलूस में मुख्य रूप से बाबू खान,हीरा सेठ,साजिद खान, ताऊ खान,, आकिल मिर्जा , मुस्तफा, कामिल आकिल नंदलाल चौहान,मिर्जा, अब्दुल्लाह खान , फ़ज़ल,महेश पटेल,शाहरुख,मनोज मौर्य, शमशाद खां ,पप्पू ,शेरू, कुलदीप सिंह,आदि लोग शामिल थे।