पीपीपी मॉडल पर यूपी के 49 बस स्टेशनों का होगा कायाकल्प

लखनऊ, 07 अप्रैल। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों को सार्वजनिक निजी सहभागिता (PPP) मॉडल पर विकसित करने के दूसरे चरण को मंजूरी मिल गई है। इस चरण में प्रारंभिक रूप से प्रस्तावित 54 बस स्टेशनों में से 6 अनुपयुक्त स्टेशनों को हटाते हुए तथा चंदौली जिले को शामिल कर कुल 49 बस स्टेशनों के आधुनिकीकरण का निर्णय लिया गया है। परियोजना को डीबीएफओटी (डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर लागू किया जाएगा, जिससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस होंगे बस अड्डे

परिवहन मंत्री Dayashankar Singh ने बताया कि इन बस स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। यात्रियों को बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता, वीआईपी लाउंज, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल और सिनेमा हॉल जैसी सुविधाएं मिलेंगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पात्रता शर्तों में बदलाव करते हुए तकनीकी क्षमता की शर्त परियोजना लागत के 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। परियोजना को पूरा करने की समय सीमा भी 5 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है।

निवेशकों के लिए शर्तों में बदलाव

योजना के तहत निवेशकों के लिए नेट वर्थ की अनिवार्यता परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तय की गई है, जबकि कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 3 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद परियोजना शुरू करने की समय सीमा 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है। साथ ही सभी स्थलों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ग्राउंड कवरेज की निःशुल्क अनुमति भी दी जाएगी।

35 या 90 वर्ष की लीज पर होंगे बस स्टेशन

परियोजना के तहत बस स्टेशनों को 35 या 90 वर्षों की लीज पर विकसित किया जाएगा। लीज अवधि पूरी होने के बाद इनका स्वामित्व स्वतः ही Uttar Pradesh State Road Transport Corporation को वापस मिल जाएगा। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि बिडिंग प्रक्रिया के दौरान यदि किसी संशोधन की आवश्यकता होती है तो उसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया जाएगा।

₹4000 करोड़ से अधिक निवेश की संभावना

परिवहन मंत्री ने बताया कि इस योजना के पहले चरण में लखनऊ, कानपुर और आगरा सहित 23 बस स्टेशनों के विकास को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है। अब दूसरे चरण के 49 बस स्टेशनों के साथ कुल 52 जनपद इस योजना से जुड़ जाएंगे। परियोजना में लगभग ₹4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान है, जबकि पहले चरण में करीब ₹2500 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। योजना के तहत बस अड्डों के कुल क्षेत्रफल का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक सुविधाओं और 45 प्रतिशत हिस्सा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाएगा।

तीन जिलों में नए बस स्टेशन के लिए भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

कैबिनेट ने सिकंदराराऊ (हाथरस), नरौरा (बुलंदशहर) और तुलसीपुर (बलरामपुर) में नए बस स्टेशनों के निर्माण के लिए निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को भी मंजूरी दी है। निर्माण कार्य दो वर्षों में पूरा करने और व्यावसायिक गतिविधियों को सात वर्षों में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 15 से 23 लाख यात्री परिवहन सेवाओं का उपयोग करते हैं, जो त्योहारों के समय 30 से 35 लाख तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में यह योजना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही शहरी भीड़भाड़ कम करने में भी सहायक होगी।

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