मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक वाराणसी में सम्पन्न: घुसपैठ, कानून व्यवस्था और विकास पर हुआ मंथन

वाराणसी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को वाराणसी के नदेसर स्थित ताज होटल में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का आयोजन सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर करीब 3 बजे तक चला, जिसके बाद सभी प्रतिनिधियों ने साथ में दोपहर का भोजन किया।

बैठक का उद्देश्य चार राज्यों के साझा हितों से जुड़े मसलों पर केंद्र और राज्यों के बीच संवाद और समन्वय को बढ़ावा देना था। इसमें कई गंभीर और जटिल विषयों पर विचार-विमर्श हुआ, जिनमें कानून व्यवस्था, सीमावर्ती घुसपैठ, महिला सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन, सामाजिक विकास और धार्मिक पर्यटन प्रमुख रहे।

गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें केवल राज्यों द्वारा सुलझाना संभव नहीं है और जिनमें केंद्र सरकार की सीधी भागीदारी आवश्यक है। इस संदर्भ में राज्यों की साझा संपत्ति, पानी और सीमा विवाद जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई। इन मुद्दों के समाधान हेतु समन्वित दृष्टिकोण पर जोर दिया गया।

बैठक में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे विशेष रूप से चर्चा के केंद्र में रहे। बांग्लादेशी घुसपैठियों, रोहिंग्या मुसलमानों और भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में बढ़ रही संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई। इन समस्याओं से निपटने के लिए राज्यों के सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से विशेष कार्ययोजना पर बल दिया गया।

महिला और बाल अपराधों पर भी विशेष चर्चा हुई। पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत दर्ज मामलों की बढ़ती संख्या और उनकी धीमी न्याय प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए इसे तेज करने और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्यों को तकनीकी और मानव संसाधन में सुदृढ़ता लाने की सलाह दी गई।

पर्यावरण और विकास के संतुलन को लेकर भी गंभीर मंथन हुआ। बैठक में हिमालय क्षेत्र से जुड़ी नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं, गैर-कानूनी खनन पर नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपायों, और सतत कृषि विकास को लेकर भी चर्चा की गई। यह तय किया गया कि पर्यावरण संरक्षण को किसी भी विकास परियोजना का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु साझा रणनीति बनाने की बात भी बैठक में सामने आई। खासकर उन क्षेत्रों में जहां धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल हैं, वहां आधारभूत संरचनाओं के विकास, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता जताई गई।

परिवहन और सड़क संपर्क से जुड़े मुद्दे भी बैठक के अहम बिंदु रहे। सीमावर्ती इलाकों में परिवहन अवरोधों को दूर करने के लिए राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही गई। इसके अलावा औद्योगिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के संदर्भ में एकीकृत योजनाएं बनाने पर जोर दिया गया।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड), मोहन यादव (मध्य प्रदेश) और विष्णु देव साय (छत्तीसगढ़) ने भी अपने-अपने राज्यों की प्राथमिकताएं रखीं और केंद्र से अपेक्षित सहयोग की मांग की।

बैठक की समाप्ति के बाद सभी प्रतिनिधियों ने साथ मिलकर लंच किया, जहां आपसी संवाद को और सुदृढ़ करने की भावना को बल मिला। कुल मिलाकर यह बैठक राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग, समझ और समाधान की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुई।

TOP

You cannot copy content of this page