मांगी नाव न केवट आना कहई तुम्हार मरमु मैं जाना,लाट भैरव की रामलीला राम घंडईल पार का मंचन धनेसरा तालाब बनी गंगा
दुर्गम मार्ग से होते गंगापार हुए राम लक्ष्मण जानकी प्रभु चरणों की महिमा बड़ी भारी है।आपके चरणकमलों के प्रताप से पत्थर की अहिल्या स्त्री बन आकाश में उड़ गयी।फिर हमारी नैय्या तो काठ की हैं।कहीं ये भी चरणरज का स्पर्श पाकर स्त्री बन जाए तो।नहीं स्वामी नहीं बिना इन चरणों को धोए चरणामृत का पान…
