103वां संकट मोचन संगीत समारोह: 11 पद्म अवॉर्डी और 14 मुस्लिम कलाकार करेंगे हनुमान जी की स्तुति

वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को समर्पित 103वां संकट मोचन संगीत समारोह इस वर्ष 6 से 11 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित आयोजन संकट मोचन हनुमान मंदिर के प्रांगण में होगा, जहां देश-विदेश के नामचीन शास्त्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से हनुमान जी की स्तुति करेंगे। इस बार समारोह की खास बात यह है कि पहली बार 14 मुस्लिम कलाकार भी मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे, जो काशी की सांस्कृतिक समरसता और गंगा-जमुनी तहजीब का अनूठा उदाहरण बनेगा।

मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष समारोह में कुल 11 पद्म पुरस्कार से सम्मानित कलाकार हिस्सा लेंगे। इनमें कई कलाकार पहली बार संकट मोचन दरबार में अपनी हाजिरी लगाएंगे। समारोह में मुख्य रूप से 45 प्रमुख कलाकारों सहित 150 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। शास्त्रीय संगीत, नृत्य और भक्ति से सराबोर यह आयोजन हर वर्ष देशभर के संगीत प्रेमियों को आकर्षित करता है।

महंत प्रो. मिश्रा ने कहा कि संकट मोचन मंदिर हमेशा से सभी धर्मों और विचारों के लोगों के लिए खुला रहा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि कम से कम एक मंदिर ऐसा रहने दिया जाए जहां हर धर्म और पंथ के लोग आकर भक्ति और कला के माध्यम से एकता का संदेश दे सकें।

इस आयोजन से पहले 2 से 5 अप्रैल तक मंदिर परिसर में संकट मोचन हनुमान जयंती के अवसर पर भव्य रामायण सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न शहरों से प्रसिद्ध रामायण मंडलियां और मानस वक्ता भाग लेंगे। अधिवेशन में सीताराम महाराज सभापति के आसन को सुशोभित करेंगे।

कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार 2 अप्रैल को सुबह 6 बजे से 9 बजे तक संकट मोचन हनुमान जी की विशेष पूजन-आरती होगी और झांकी निकाली जाएगी। इसके बाद सुबह 9 बजे से श्री रामायण जी की पूजन-आरती और श्रीरामचरितमानस का एकाह पाठ प्रारंभ होगा। उसी दिन शाम को भजन संध्या और रामायण मंडलियों द्वारा पूरी रात अखंड रामायण गान किया जाएगा।

वहीं 3 से 5 अप्रैल तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक केवल रामचरितमानस पर प्रवचन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के प्रतिष्ठित वक्ता भाग लेंगे।

महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने सभी रामभक्तों और मानस प्रेमियों से इस पावन आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव केवल भक्ति का ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, संगीत और आध्यात्मिक परंपरा का भी महापर्व है, जिसमें शामिल होकर श्रद्धालु पुण्य और यश के भागीदार बन सकते हैं।

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