
श्री पंचायती नया उदासीन ने छावनी क्षेत्र में किया भव्य प्रवेश
महाकुम्भ नगर, 10 जनवरी। संगम की पावन धरती पर धर्म, अध्यात्म और भक्ति की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। सनातन परंपरा के सभी प्रमुख सम्प्रदाय इस महाकुम्भ में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। शैव और वैष्णव अखाड़ों के बाद अब उदासीन सम्प्रदाय ने भी अपनी भक्ति धारा प्रवाहित करते हुए महाकुम्भ को और भव्य बना दिया है। इसी क्रम में श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन ने अपनी छावनी प्रवेश यात्रा के साथ महाकुम्भ क्षेत्र में भव्य प्रवेश किया।
गुरुबाणी से गूंजा महाकुम्भ क्षेत्र
महाकुम्भ में शिव भक्तों के “हर-हर महादेव” और वैष्णवों के “जय श्री राम” के उद्घोष के बीच अब “जय श्री चन्द्र” और गुरु नानक देव जी की गुरुबाणी भी गूंजने लगी है। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन ने अपनी छावनी प्रवेश यात्रा में इस आध्यात्मिक भव्यता का परिचय दिया। संगत साहब की संत परंपरा को मानने वाले इस अखाड़े की यात्रा को देखने के लिए कुम्भ क्षेत्र और शहर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
पालकी में अखाड़े के इष्टदेव श्री चन्द्रदेव भगवान की मूर्ति को सजाकर आगे-आगे चलाया गया, जबकि उनके पीछे साधु-संतों और महंतों का विशाल जुलूस चल रहा था। यात्रा के दौरान भ्रमणशील रमता पंचों के साथ गुरु नानक देव जी की अमृत वाणी गूंजती रही। अखाड़े के सचिव महंत जगतार मुनि के अनुसार, इस दिव्य यात्रा में सात हजार से अधिक साधु-संत, महंत और महा मंडलेश्वर शामिल हुए।
सामाजिक सेवा और संस्कृति का जागरण
श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़े की छावनी प्रवेश यात्रा मुट्ठीगंज स्थित मुंशी राम बगिया से प्रारंभ हुई। यह यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होकर महाकुम्भ क्षेत्र पहुंची। मार्ग में अनेक स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर साधु-संतों का स्वागत किया।
महंत जगतार मुनि ने बताया कि अखाड़े की छावनी में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन होंगे। जाति-पाति और ऊंच-नीच के भेदभाव को नकारने वाले इस अखाड़े में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए भंडारे (लंगर) का आयोजन होगा। इसके साथ ही चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे और संतों के प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।
आस्था का दिव्य संगम
श्री पंचायती नया उदासीन का महाकुम्भ में प्रवेश न केवल भक्ति और अध्यात्म को और समृद्ध करता है, बल्कि यह सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक जागरूकता का भी संदेश देता है। गुरु नानक देव जी की गुरुबाणी और संतों की उपस्थिति इस आयोजन को अद्वितीय बना रही है। महाकुम्भ के इस आयोजन में उदासीन सम्प्रदाय ने अपने धार्मिक और सामाजिक योगदान से नई छटा बिखेरी है।